उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड के मुद्दे पर तकरार, भाजपा-कांग्रेस आए आमने-सामने

उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड के मुद्दे पर तकरार, भाजपा-कांग्रेस आए आमने-सामने
Spread the love

देहरादून। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड )को लेकर उठाए गए कदम पर सियासत शुरू हो गई है। इस मुद्दे पर भाजपा का कहना है कि हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली कांग्रेस को देशहित का यह फैसला भी गलत लग रहा है। जबकि कांग्रेस का कहना है कि भाजपा केवल ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के फैसले ले रही है। भाजपा ने बुनियादी मुद्दों को भुला दिया है।

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र भसीन ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने का फैसला स्वागत योग्य है। भाजपा ने चुनाव पूर्व जनता से जो वादे किए, धामी के नेतृत्व में सरकार उन्हें पूरा करने के लिए तत्पर है। भसीन ने कहा कि जमाने से तुष्टिकरण की राजनीति करती आ रही कांग्रेस को जनहित का यह फैसला रास नहीं आ रहा। कांग्रेस ‘एक देश-एक व्यवस्था’ के मौलिक सिद्धांत की विरोधी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं को पता होना चाहिए कि समान नागरिक संहिता लागू किया जाना, संविधान सम्मत है। संविधान के नीति निर्देशक तत्वों के अनुच्छेद 44 में देश में समान नागरिक संहिता लागू करने का उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि अफसोस की बात यह है कि कांग्रेस को ये बातें समझ ही नहीं आतीं। कांग्रेस का सिद्धांत समाज में विभाजन करके सत्ता में आने का रहा है। कांग्रेस का यही रवैया आने वाले दिनों में कांग्रेस को इतिहास में समेट देगा, यह बात भी साफ दिखाई दे रही है।

प्रीतम बोले जनहित के फैसले करिए, भरमाने वाले नहीं
निवर्तमान नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि भाजपा अपने जन्म से अब तक जुमलेबाजी और बांटने की राजनीति करती आई है। राजीव भवन में शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में प्रीतम ने कहा कि चुनाव के दौरान भाजपा ने मुफ्त सिलेंडर, पेंशन राशि बढ़ाने, बेरोजगारों को आर्थिक मदद, पूर्व सैनिकों के बच्चों की छात्रवृत्ति बढ़ाने जैसे तमाम वादे किए थे। इसके विपरीत पहली कैबिनेट में उस विषय पर निर्णय लिया गया जो कि भाजपा के घोषणा पत्र में भी नहीं था। जनता को महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण करने वाले फैसलों की जरूरत है, न कि राजनीतिक एजेंडे से जुड़े फैसलों की। रही बात समान नागरिक संहिता की तो यह राज्य के अधिकार क्षेत्र में भी नहीं है। भाजपा खुद भी इस सच्चाई को जानती है, लेकिन फिर भी शिगूफे छोड़ रही है। बकौल प्रीतम बहुत मुमकिन है कि आज समान संहिता पर समित गठन करने की बात करने वाली भाजपा को इस मुद्दे की भविष्य में 2027 के चुनाव के दौरान ही याद आए।

admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *