उत्तराखंड

राज्य आंदोलनकारियों की पीड़ा

(यमकेश्वर)सभी सम्मानित बंधु ( चिन्हित राज्य आंदोलनकारी समिति/ राज्य निर्माण सेनानी, रजिस्टर्ड- उत्तराखंड प्रदेश/ दिल्ली,,) को खेद के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि -उत्तराखंड सरकार, राज्य निर्माण के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रजत जयंती समारोह बड़े धूमधाम से मनाने जा रही है, ✍️इसी परिपेक्ष में सरकार द्वारा- रजत जयंती महोत्सव का श्रेय और प्रेय लूटने के लिए, उत्तराखंड में बड़ी-बड़ी हस्तियों को बुलाकर, वाह वाही लूटी जा रही है,
✍️ इसी संदर्भ में भारत के सम्मानित राष्ट्रपति, भारत के सम्मान प्रधानमंत्री, और अन्य गणमान्य तथा प्रवासी मेहमानों को- उत्तराखंड के करोड़ों -करोड़ों रुपए खर्च करके देहरादून के समारोह में कॖमश: बुलाया जा रहा है,
✍️परंतु खेद का विषय है कि- जिन शहीदों / मातृशक्ति / युवाओं बड़े बुजुर्गों और पॖबुद्ध जनो के बलिदान से उत्तराखंड राज्य का निर्माण हुआ था ,
राज्य निर्माण सेनानियों/ राज्य आंदोलनकारीयों को और उनके परिजनों को इस कार्यक्रम में कहीं भी, किसी भी प्रकार का कोई निमंत्रण नहीं है, ✍️दिखावे भर के लिए ,निमंत्रण पत्र तहसील स्तर से, अथवा दूरभाष के माध्यम से, अनधिकृत सूचना के माध्यम से दिए जा रहे हैं,
✍️सूचना देने के लिए भी 25 पैसे के कागज का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि देहरादून के समारोह में उत्तराखंड राज्य निर्माण और राज्य निर्माण आंदोलनकारीयों की नाम पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए जा रहे हैं,
✍️ हमारी सबसे पुरानी एकमात्र रजिस्टर्ड समिति- सरकार के इस प्रकार के छलावे की घोर निंदा करती है,
✍️ उत्तराखंड सरकार राज्य स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर यदि-हमारी जो पूर्ववर्ती मांगे हैं, (जो की सरकार को बार-बार लिखित रूप में दी जा चुकी हैं) उन पर यदि संतोषजनक घोषणा नहीं करती है ,शासनादेश जारी नहीं करती है, तब तक हम लोग किसी भी प्रकार के- सरकारी सम्मान समारोह का संपूर्ण बहिष्कार करते हैं,
✍️ हम अपनी समिति के सभी राज्य निर्माण सेनानियों /चिन्हित राज्य आंदोलनकारीयों से अपील करते हैं कि- वह भी ऐसे सभी कार्यक्रमों का बहिष्कार करें,
✍️हमारी स्पष्ट मांग है कि- जब तक हमारी पूर्ववर्ती मांग- हमें राज्य निर्माण सेनानी का दर्जा, शासनादेश के तहत दिया जाए, 10% क्षेतिज आरक्षण को कानूनन बहाल किया जाए, सम्मानजनक पेंशन और अन्य जितनी भी लम्बित हमारी मांगे हैं, उन पर आति शीघ्र विचार किया जाए, घोषणा की जाए, तभी हम सम्मान लेने के लिए सहमत होंगे, अन्यथा हम सरकार के झांसे में आने वाले नहीं है,₹100 का शाल ₹15 की फूल माला लेकर ,जो सम्मान हमें दिया जा रहा है, वह सम्मान नहीं, बल्कि एक तमाचा है, जिनको सरकारी तमाशा पसंद है,वह तमाशा मैं भाग ले सकते हैं,
✍️ परंतु जो सच्चे राज्य निर्माण सेनानी/ राज्य आंदोलन कारी होंगे , वह सभी सरकारी कार्यक्रमों का बहिष्कार करेंगे, सरकार के द्वारा संपूर्ण राज्य आंन्दोलंनकारियों को जिस चालाकी से मूर्ख बनाया जाता रहा है,
👹यह घोर निंदा और शर्म का विषय है,
🙏 आत्म सम्मान के लिए हमें सरकारी छलावे का विरोध करना चाहिए , सम्मान समारोह का बहिष्कार करना चाहिए,
🙏समिति के केंद्रीय अध्यक्ष -श्री भूपेंद्र सिंह रावत जी द्वारा- दूरभाष से उपरोक्त संदर्भ में सभी को सूचित किये जाने का प्रयास किया जा रहा है, और यह व्हाट्सएप सूचना उन्ही के निर्देश पर दी जा रही है,
✍️कृपया सूचना की गंभीरता को समझने का प्रयास करेंगे,

🫵मान सहित विष खाई के- शंभू भयो जगदीश,

🫵 बिना मान अमृत पिए,
राहु कटायो शीश,

✍️अतः सरकारी अनादर का हमें बहिष्कार करना चाहिए ,
✍️ हम सरकारी नीतियों का पुरजोर विरोध करते हैं, निंदा करते हैं,,
🙏 जय उत्तराखंड,
🙏जयभारत,

भवदीय:-
महिमानन्द
भट्टकोटी,
(केंद्रीय मुख्य प्रवक्ता)
चिन्हित राज्य आंदोलनकारी समिति/राज्य निर्माण सेनानी,
रजिस्टर्ड- उत्तराखंड प्रदेश/ दिल्ली,,

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